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प्राचार्य की लेखनी से

अनुभव क्षेत्र की व्यापकता और युवा चेतना का समन्वय किसी भी विषय की सफलता का आधारभूत स्तम्भ हुआ करता है। संस्थापक श्री हरिद्वार सिंह के लम्बे अनुभव और प्रबन्धक श्री सुनील सिंह की युवा सोच के सुन्दर समन्वय से वर्ष 2005 में संस्थापित यह महाविद्यालय अपने प्रगति के पथ पर निरन्तर अग्रसर हो रहा है। 20-25 कि0मी0 की व्रहद परिधि के बीच में उच्च शिक्षा का एक मात्र केन्द्र होने के कारण इस महाविद्यालय का महत्व एवं जिम्मेदारी भी अधिक हो जाती।

हिन्दी, संस्कृत, राजनीतिशास्त्र, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान, प्राचीन इतिहास, समाजशास्त्र, शिक्षा शास्त्र, भूगोल की मान्यता स्नातक स्तर पर एवं हिन्दी, गृह विज्ञान विषय मे स्नातकोतर की मान्यता शासन द्वारा प्राप्त है। अनुभवी सुयोग्य एवं कर्मठ प्राध्यापकों द्वारा नियमित कक्षा संचालक हमारी विशिष्टता है। अनेक व्यावसायिक पाठ्यक्रमो के सचालन के लिए महाविद्यालय प्रयत्नशाील है। विश्वास है कि आगामी एक, दो वर्षों में उक्त पाठ्यक्रमों के संचालन हेतु वैधानिक मान्यता प्राप्त हो जायेगी ।

विषयगत शिक्षा के साथ-साथ छात्र/छात्राओं के चतुर्दिक विकाश के लिए महाविद्यालय प्रशासन कृत संकल्प है। कला, संस्कृति, साहित्य इत्यादि विधाओं में अभिरूचि रखने वालों के लिए विशेष अवसर प्रदान करने हेतु हम अनवरत प्रयत्नशील रहते हैं। स्नातक की उपाधि प्राप्त करना किसी भी व्यक्ति के लिए एक सुखद अनुभव होता हैं। राष्ट्र निर्माण में एक स्नातक की भुमिका भी अधिक होती है, इस बात को दृष्टिगत रखते हुए हम छात्र/छात्राओ के व्यक्ति एवं चारित्रिक विकास को लक्ष्य में रखते है।

राष्टीय राजमार्ग सं0 24 पर स्थित यह महाविद्यालय आज इस अंचल विशेष के लिये विशेष रखता है। हमारे क्षेत्रीय समाज में व्याप्त आवागमन की दुरूहताओं, आर्थिक तंगी से त्रस्त अभिभावकों एवं दूर जाकर शिक्षा ग्रहण करने में असमर्थ छात्र/छात्राओ के लिए यह महाविद्यालय एक सुखद अनुभूति है।

शांत, सुन्दर एवं पवित्र वातावरण में स्थित यह महाविद्यालय उच्च शिक्षा का एक अनुपम केन्द्र है। यह महाविद्यालय विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण प्रदान करने के प्रति दृढ़ आस्था रखता है। शैक्षणिक वातावरण को सुनिक्ष्वित करने के लिए महाविद्यालय प्रशासन अनुशासन को सर्वोपरि रखता है। स्वस्थ मानसिकता के साथ विद्यार्थियो को अध्ययन एवं अनुभव का अवसर प्रदान करने के लिए हम प्रतिबद्व है। अनुशासन एवं उन्मुक्ता का समन्वय, आध्यात्मिकता एवं आधुनिकता के प्रति लगाव, समर्पण एवं सेवा का भाव, सभ्यता एवं संस्कृति के प्रति जिज्ञासा एवं आस्था हमारी विशिष्टिताएं है।

नव शैक्षणिक सत्र मे प्रवेश के इच्छुक समस्त छात्र/छात्राओं से हम यह अपेक्षा करते है कि यहॉं पर प्रवेश लेने के उपरान्त महाविद्यालय के नियम नीति एवं अनुशासन के प्रति आस्था रखते हुए विषय विशेषज्ञ शिक्षको से ज्ञानार्जन करते हुए अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करेंगे और देश व समाज के प्रति अपनी महती जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करेंगे और देश व समाज के प्रति अपनी अस्मिता को रेखांकित करते हु समाज मे प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे तथा महाविद्यालय का मान बढ़ायेंगे।

डॉ0 समर बहादुर सिंह

प्राचार्य

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