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अध्यक्ष के विचार...

चन्दौली जनपद का पूर्वी छोर जो बिहार प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है वह नरवन परगने के नाम से विख्यात है। स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व यह क्षेत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पराक्रम के चलते ख्यात हुआ तो स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरान्त 'धान के कटोरे' के रूप में इसकी ख्याति बढी। धन-धान्य से परिपूर्ण यह क्षेत्र प्रगति के पथ पर अग्रसर हुआ। अनेक इण्टर कालेजों की स्थापना से शैक्षिक उन्नयन हुआ लेकिन विकाश के अनेक आयाम स्थापित करने के बाद भी यह क्षेत्र उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछडा रहा और लम्बे अरसे तक पिछडता ही चला गया। चन्दौली मुख्यालय से जमानिया तक 35 कि0मी0 के बीच मे एक भी उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना न हो पाना इस बात का एक प्रबल प्रमाण है।

उच्च शिक्षा प्राप्ति हमारे क्षेत्र में एक जटिल समस्या बन गयी थी- विशेषतः छात्राओं और निम्न मध्यवर्गीय परिवार के छात्रों के लिए यह एक चुनौती थी। अपने क्षेत्र में छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की परेशानियों से मन पहले से ही इस दिशा में सोच रहा था कि कुछ मित्रों सहयोगियों इत्यादि की पे्ररणा से मन इस क्षेत्र मे कुछ करने के लिए आन्दोलित हो उठा। क्योकि अपने जीवन मे विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव मुझे प्राप्त हुआ लेकिन हर क्षेत्र में शिक्षा के अभाव को मैं सहज रूप से अनुभव करता रहा। अतः इन सारी बातों सें अनुभव लेते हुए मैंने महाविद्यालय की स्थापना का निश्चय किया और ईश्वरीय कृपा से वर्ष 2005 में हमारे महाविद्यालय को स्नातक कला में शासन द्वारा विधिक मान्यता प्रदान कर दी गयी। वर्ष 2014 से हिन्दी एवं गृह विज्ञान में स्नातकोतर की कक्षांए भी संचालित है।

अपने महाविद्यालय के विकाश से पूर्णतया संतुष्ट हो जाना तो बेइमानी होगी लेकिन इस अल्प अवधि में महाविद्यालय ने जो प्रगति की है उसे देखकर मैं भविष्य के प्रति आशान्वित हू।

आज महाविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिये आने वाले समस्त छात्र-छात्राओं को जब पढ़ते-लिखते हुए आपस में अनेक तरह की सार्थक चर्चाएं करते हुए देखता हू तो मन आनन्दविभोर हो जाता है। आज उम्र के इस पड़ाव पर शायद बहुत कुछ करने की हमारी सामथ्र्य नही है. लेकिन उम्मीद करता हू कि प्रबन्धक प्राचार्य और प्राध्यापकगण इस महाविद्यालय को उतरोतर प्रगति के पथ पर अग्रसर करते रहेंगे और महाविद्यालय में अनेक नवीन पाठयक्रमों का संचालन प्रारम्भ कराकर इसे उच्च शिक्षा का एक सुन्दर एवं महत्वपूर्ण केन्द्र बनायेंगे। इन्ही शब्दों के साथ मैं अपने प्रबन्धक. प्राचार्य. प्राध्यापकों. छात्र-छा़त्राओं तथा अभिभावकों के प्रति हार्दिक शुभकामना व्यकत करते हुए अपेक्षा करता हू कि सबके सहयोग से महाविद्यालय अनवरत प्रगति के पथ पर अग्रसर होता रहेगा |

हरिद्Iर सिंह

संस्थापक / अध्यक्ष

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